नेपाल में Gen Z विरोध: पीएम ओली का इस्तीफा, राष्ट्रपति पौडेल ने वार्ता का आह्वान किया – अब आगे क्या?
नेपाल में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे और Gen Z के हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद, राष्ट्रपति पौडेल ने शांतिपूर्ण बातचीत का आह्वान किया है। जानें क्यों शुरू हुए ये विरोध और आगे क्या हो सकता है।
नेपाल में Gen Z विरोध: पीएम ओली का इस्तीफा, राष्ट्रपति पौडेल ने वार्ता का आह्वान किया – अब आगे क्या?
नेपाल का राजनीतिक परिदृश्य इस समय बड़े पैमाने पर उथल-पुथल और अनिश्चितता का सामना कर रहा है। राजधानी काठमांडू और आसपास के इलाकों में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इन विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व मुख्य रूप से Gen Z यानी युवा पीढ़ी कर रही है, जो सरकार के कथित भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और कुशासन के खिलाफ सड़कों पर उतरी हुई है। प्रधानमंत्री के इस्तीफे के तुरंत बाद, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने देश में शांति बनाए रखने और सभी संबंधित पक्षों से अगले सप्ताह बातचीत के लिए आगे आने की अपील की है ताकि इस बढ़ते संकट का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके।
विरोध प्रदर्शनों का उदय और मांगेंइन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर हुई थी, जिसे सोमवार देर रात हटा लिया गया। हालांकि, यह प्रतिबंध केवल चिंगारी साबित हुआ, जिसने वर्षों से जमा हो रहे सार्वजनिक आक्रोश को भड़का दिया। जल्द ही प्रदर्शनकारी भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग, भाई-भतीजावाद और सरकारी धन के कथित कुप्रबंधन के लिए जवाबदेही की मांग करने लगे। '#NepoKids' जैसे हैशटैग सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगे, जो सरकारी अधिकारियों और उनके परिवारों द्वारा कथित रूप से प्रदर्शित की जाने वाली अकूत संपत्ति के खिलाफ युवाओं के गुस्से को दर्शाता है। यह विरोध सिर्फ एक सोशल मीडिया प्रतिबंध के बारे में नहीं था, बल्कि यह नेपाल में सुशासन और पारदर्शिता की गहरी मांग को दर्शाता है।
हिंसा और हताहतदुर्भाग्य से, ये विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में कम से कम 19 प्रदर्शनकारियों की जान चली गई है, जबकि सैकड़ों अन्य घायल हुए हैं। सोमवार, 8 सितंबर, 2025 को संघीय संसद भवन के बाहर सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए कथित तौर पर गोलियां चलाईं, आंसू गैस के गोले छोड़े और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया। इस हिंसा के जवाब में, प्रदर्शनकारियों ने कई शीर्ष राजनेताओं के निजी आवासों को निशाना बनाया और आग लगा दी, जिनमें प्रधानमंत्री ओली का काठमांडू स्थित घर भी शामिल था। इसके अतिरिक्त, प्रदर्शनकारियों ने संघीय संसद भवन और शीतल निवास स्थित राष्ट्रपति कार्यालय जैसे प्रमुख सरकारी संस्थानों में भी तोड़फोड़ की और उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया।
प्रमुख राजनीतिक घटनाक्रमप्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने 9 सितंबर, 2025 को अपना इस्तीफा सौंप दिया, यह कहते हुए कि यह 'समस्या का समाधान करने और इसे राजनीतिक रूप से हल करने में मदद करने' के लिए है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया। ओली के इस्तीफे से पहले, सोमवार शाम को गृह मंत्री रमेश लेखक ने मौद्रिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया था। उनके अलावा, कृषि मंत्री राम नाथ अधिकारी, युवा और खेल मंत्री तेजू लाल चौधरी और जल मंत्री प्रदीप यादव ने भी इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफे दर्शाते हैं कि सरकार पर विरोध प्रदर्शनों का कितना गहरा दबाव था।
राष्ट्रपति का शांति और संवाद का आह्वानओली के इस्तीफे के बाद, राष्ट्रपति पौडेल ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में मांगों को संवाद और बातचीत के माध्यम से संबोधित किया जा सकता है, और आगे किसी भी नुकसान को रोकने के लिए संयम बनाए रखना महत्वपूर्ण है। उनका यह आह्वान ऐसे समय में आया है जब देश गहरी राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है और आगे का रास्ता बेहद अनिश्चित दिख रहा है।
सुरक्षा और यात्रा पर प्रभावविरोध प्रदर्शनों के कारण काठमांडू घाटी के विभिन्न हिस्सों, जैसे काठमांडू, भक्तपुर और ललितपुर जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। काठमांडू अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भी बंद कर दिया गया, जिससे निर्धारित अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें रद्द या मार्ग बदल दी गईं। भारत सहित अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षक स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने नागरिकों को स्थिति सामान्य होने तक नेपाल की यात्रा टालने और जो लोग वहां हैं उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और उत्तराखंड पुलिस द्वारा भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा भी कड़ी कर दी गई है।
नेपाली सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों ने भी एक संयुक्त अपील जारी की है, जिसमें नागरिकों, विशेषकर युवाओं से संयम बनाए रखने, राष्ट्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने और बातचीत के माध्यम से शांतिपूर्ण समाधान खोजने का आग्रह किया गया है।
आगे का रास्ताप्रधानमंत्री ओली का इस्तीफा और राष्ट्रपति पौडेल का संवाद का आह्वान, नेपाल के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ प्रस्तुत करता है। Gen Z के नेतृत्व में हुए इन विरोध प्रदर्शनों ने देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया है। अब यह देखना होगा कि क्या राजनीतिक नेतृत्व इन मांगों को गंभीरता से लेता है और एक स्थायी समाधान की दिशा में काम करता है, या क्या यह संकट और गहराएगा। नेपाल को एक ऐसे शांतिपूर्ण और समावेशी समाधान की आवश्यकता है जो भविष्य के लिए स्थिरता और सुशासन सुनिश्चित कर सके।
यह विरोध प्रदर्शन नेपाल के लोकतंत्र के लिए एक परीक्षा है, जहां युवाओं की आवाज को अनसुना नहीं किया जा सकता है। अगला सप्ताह, जब बातचीत की उम्मीद है, यह तय करने में महत्वपूर्ण होगा कि नेपाल किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
Reviewed by लोकतंत्र News
on
September 09, 2025
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